Jhulelal Aarti: Difference between revisions

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आरती कीजे अमर गो साईं…
आरती कीजे अमर गो साईं…
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Latest revision as of 10:18, 23 October 2024

Jhulelal Aartin in Sindhi Devnagari

आरती कीजे अमर गो साईं- जलपत जिंदा ज़ाहिर साईं
पहिली आरती जल की पूजा॒ – एक निरंजन अवर न दूजा
आरती कीजे अमर गो साईं…..
दूसरी आरती धरत उपायइ – पाणीअ ऊपर आप बिराजे
आरती कीजे अमर गो साईं…..
तीसरी आरती त्रिगुण कीजे – ब्रह्मा विष्णू महादेव लीजिये
आरती कीजे अमर गो साईं…..
चौथम आरती चार ई खाणियूं – ब्रह्मा वेद रचियो मुख बा॒णियूं
आरती कीजे अमर गो साईं…..
पंचम आरती पंच ई तत्वा – माया जग॒त कयो उत्पता
आरती कीजे अमर गो साईं….
करऊं आरती हरि गुण गाओ – सूरज चंद्र दोनों दीप जगा॒ओ
आरती कीजे अमर गो साईं….
हीअ आरती सुनो और गाओ – जो जो मंशा लाल पुजा॒यो
आरती कीजे अमर गो साईं….
जहिं त बे॒ड़िअ ते बा॒झ कयाईं – सा बे॒ड़ी ना बु॒ड़े लाल
आरती कीजे अमर गो साईं….
घोड़ो तुहिंजो क़ाइम दाइम – सीर उते थो कुड़े॒ लाल
आरती कीजे अमर गो साईं….
साओ चाबुक सोनो नगारो – सत्गुर हथ में आहे लाल
आरती कीजे अमर गो साईं….
सेजा तुहिंजी लालण सुहिणी – गुलनि जी गुलिज़ारी लाल
आरती कीजे अमर गो साईं…
‘सूरदास’ तेरी आरती गावे – दुःख भंजन सुख लाल पुजा॒ये
आरती कीजे अमर गो साईं…