Jhulelal Aarti: Difference between revisions
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आरती कीजे अमर गो साईं- जलपत जिंदा ज़ाहिर साईं | आरती कीजे अमर गो साईं- जलपत जिंदा ज़ाहिर साईं | ||
पहिली आरती जल की पूजा॒ – एक निरंजन अवर न दूजा | पहिली आरती जल की पूजा॒ – एक निरंजन अवर न दूजा | ||
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‘सूरदास’ तेरी आरती गावे – दुःख भंजन सुख लाल पुजा॒ये | ‘सूरदास’ तेरी आरती गावे – दुःख भंजन सुख लाल पुजा॒ये | ||
आरती कीजे अमर गो साईं… | आरती कीजे अमर गो साईं… | ||
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Revision as of 21:06, 25 January 2024
Jhulelal Aartin in Sindhi Devnagari
आरती कीजे अमर गो साईं- जलपत जिंदा ज़ाहिर साईं पहिली आरती जल की पूजा॒ – एक निरंजन अवर न दूजा आरती कीजे अमर गो साईं….. दूसरी आरती धरत उपायइ – पाणीअ ऊपर आप बिराजे आरती कीजे अमर गो साईं….. तीसरी आरती त्रिगुण कीजे – ब्रह्मा विष्णू महादेव लीजिये आरती कीजे अमर गो साईं….. चौथम आरती चार ई खाणियूं – ब्रह्मा वेद रचियो मुख बा॒णियूं आरती कीजे अमर गो साईं….. पंचम आरती पंच ई तत्वा – माया जग॒त कयो उत्पता आरती कीजे अमर गो साईं…. करऊं आरती हरि गुण गाओ – सूरज चंद्र दोनों दीप जगा॒ओ आरती कीजे अमर गो साईं…. हीअ आरती सुनो और गाओ – जो जो मंशा लाल पुजा॒यो आरती कीजे अमर गो साईं…. जहिं त बे॒ड़िअ ते बा॒झ कयाईं – सा बे॒ड़ी ना बु॒ड़े लाल आरती कीजे अमर गो साईं…. घोड़ो तुहिंजो क़ाइम दाइम – सीर उते थो कुड़े॒ लाल आरती कीजे अमर गो साईं…. साओ चाबुक सोनो नगारो – सत्गुर हथ में आहे लाल आरती कीजे अमर गो साईं…. सेजा तुहिंजी लालण सुहिणी – गुलनि जी गुलिज़ारी लाल आरती कीजे अमर गो साईं… ‘सूरदास’ तेरी आरती गावे – दुःख भंजन सुख लाल पुजा॒ये आरती कीजे अमर गो साईं…
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