Shri Amar Katha: Difference between revisions
No edit summary |
No edit summary |
||
| Line 17: | Line 17: | ||
#. सातवां अध्याय - सृष्टि रचना सूक्ष्म वर्णन, सुन्दरदासं को चर्तुभुज दर्शन, तुर्कों को उपदेश, जप साहिब, सुख उत्पत्ति व आरतहित (57-74) | #. सातवां अध्याय - सृष्टि रचना सूक्ष्म वर्णन, सुन्दरदासं को चर्तुभुज दर्शन, तुर्कों को उपदेश, जप साहिब, सुख उत्पत्ति व आरतहित (57-74) | ||
#. आठ्वां अध्याय - नसरपुर में प्रभु का आगमन, मुण्डन संस्कार, पाठशाला जाना (74-79) | #. आठ्वां अध्याय - नसरपुर में प्रभु का आगमन, मुण्डन संस्कार, पाठशाला जाना (74-79) | ||
#. | #. नौवंा अध्याय .... - श्री अमरलाल-महादेव संवाद, गुरू दीक्षा गुरू महिमा, अर्थवेद मन्त्र (79-92) | ||
#. दसवां अध्याय... आपे गुरू आपे चेला, जगमर्यादा स्थापना, लोगों की शंका निवारण: (92-98) | #. दसवां अध्याय... आपे गुरू आपे चेला, जगमर्यादा स्थापना, लोगों की शंका निवारण: (92-98) | ||
#. ग्यारहवां अध्याय - श्री अमरलाल द्वारा पुगर सन्त को दीक्षा देना जल ज्योति के सेवा की. विधि, का वर्णन, विद्या गुरू की मरी गाय को जीवन दान (98-110) | #. ग्यारहवां अध्याय - श्री अमरलाल द्वारा पुगर सन्त को दीक्षा देना जल ज्योति के सेवा की. विधि, का वर्णन, विद्या गुरू की मरी गाय को जीवन दान (98-110) | ||
#. बारहवां अध्याय. - भक्त धना, सुन्दरदास, पुगरसन्त व माता पिता को दिव्य दर्शन व मोक्ष सुन्दरदास द्वारा अमरकथा रचना की आज्ञा पाना (110-117) | #. बारहवां अध्याय. - भक्त धना, सुन्दरदास, पुगरसन्त व माता पिता को दिव्य दर्शन व मोक्ष सुन्दरदास द्वारा अमरकथा रचना की आज्ञा पाना (110-117) | ||
#. तेरहवां अध्याय - जललोक में दर्शन, सन्त पुगर द्वारा स्तुति, सात अमुल्य वस्तुएं प्रदान चालीहा व्रत, जल में आइुति की विधि, गुरु रखड़ी का. महत्व | माता द्वारा शुंभ-निशुंभ का. वध, राजा कुद्रम द्वारा वरुण बली द्वारा आपदा निवारण, क्षीर सागर में वरुणदेव और विष्णु भगवान की स्तुति (117-174) | #. तेरहवां अध्याय - जललोक में दर्शन, सन्त पुगर द्वारा स्तुति, सात अमुल्य वस्तुएं प्रदान चालीहा व्रत, जल में आइुति की विधि, गुरु रखड़ी का. महत्व | माता द्वारा शुंभ-निशुंभ का. वध, राजा कुद्रम द्वारा वरुण बली द्वारा आपदा निवारण, क्षीर सागर में वरुणदेव और विष्णु भगवान की स्तुति (117-174) | ||
#. चौदहवां अध्याय. - अमर गादी सन्त ठकुर पुगरदेव को, सन्त पुगर द्वारा जल ज्योति की पूजा करवाना, अमरनाथ, बद्रीनाथ, मानसरोवर, हिंगलाज की यात्रा | #. चौदहवां अध्याय. - अमर गादी सन्त ठकुर पुगरदेव को, सन्त पुगर द्वारा जल ज्योति की पूजा करवाना, अमरनाथ, बद्रीनाथ, मानसरोवर, हिंगलाज की यात्रा (175-204) | ||
#. पन्द्रहवां अध्याय - वद्धावस्था में सन्त पुगरदेव को पुत्र, अम्माबाई जन्म प्रकरण | #. पन्द्रहवां अध्याय - वद्धावस्था में सन्त पुगरदेव को पुत्र, अम्माबाई जन्म प्रकरण (205-227) | ||
#. सोलहवां अध्याय - हैग्रीव देव द्वारा दैत्यो का नाश, देवों को आनन्द (228- | #. सोलहवां अध्याय - हैग्रीव देव द्वारा दैत्यो का नाश, देवों को आनन्द (228-230) | ||
#. सत्रहवां अध्याया. - हिंगलाज माता, कुनुकलाची (कराची), मनोहर स्थान, सुजाननाथ व गौरखनाथ का वर्णन | #. सत्रहवां अध्याया. - हिंगलाज माता, कुनुकलाची (कराची), मनोहर स्थान, सुजाननाथ व गौरखनाथ का वर्णन (231-235) | ||
#. अठारहवां अध्याय - बालभे में 68 | #. अठारहवां अध्याय - बालभे में 68 तीर्थो का समावेश, उदयचन्द्र अर्न्तध्यान स्थल तीर्थ स्थान (235-262) | ||
#. उन्नीसवां अध्याय - बिबिर तिबर पुगर सन्त वार्ता, सन्त पुगर द्वारा जल लोक गमन | #. उन्नीसवां अध्याय - बिबिर तिबर पुगर सन्त वार्ता, सन्त पुगर द्वारा जल लोक गमन (263-270) | ||
#. बीसवां अध्याय - अमाबाई द्वारा तप करना, सन्त YOR का घर लौट आना पुत्र प्राप्ति | #. बीसवां अध्याय - अमाबाई द्वारा तप करना, सन्त YOR का घर लौट आना पुत्र प्राप्ति (270-283) | ||
#. इक्कीसवां अध्याय- ठाकुर बुढढालाल के जन्म अवसर पर श्री अमरलाल जी की उपस्थिति और सहस्त्र नाम. | #. इक्कीसवां अध्याय- ठाकुर बुढढालाल के जन्म अवसर पर श्री अमरलाल जी की उपस्थिति और सहस्त्र नाम. (283-292) | ||
#. बाईसवां अध्याय - सन्त पुगर, निर्मलाबाई का अमरलोक जाना, अम्माबाई अर्न्तध्यान | #. बाईसवां अध्याय - सन्त पुगर, निर्मलाबाई का अमरलोक जाना, अम्माबाई अर्न्तध्यान -(292-303) | ||
#. तेईसवां अध्याय. - श्री अमरकथा का महात्तम | #. तेईसवां अध्याय. - श्री अमरकथा का महात्तम - (303-305) | ||
#. भगवान श्री झूलेलाल/सन्त ठकुर पुगरदेव के वर्तमान गादेश्वर का सक्षिप्त परीचय | #. भगवान श्री झूलेलाल/सन्त ठकुर पुगरदेव के वर्तमान गादेश्वर का सक्षिप्त परीचय (305-319) | ||
#. गिरगिट की कथा (319-321) | #. गिरगिट की कथा (319-321) | ||
#. भगवान श्री उदयचन्द्र द्वारा श्री सांख्ययोग तत्वज्ञान का वर्णन (322-353) | #. भगवान श्री उदयचन्द्र द्वारा श्री सांख्ययोग तत्वज्ञान का वर्णन (322-353) | ||